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जन्म कुंडली का आधार जन्म समय होता है कभी-कभी कुछ लोगों के पास अपनी जन्म तारीख का भी ज्ञान नहीं होता तो उस स्थिति में क्या किया जाए। अनेक लोगों की जिज्ञासा रहती है कि मेरे ग्रह कैसे हैं कौन सा ग्रह अशुभ है और कौन सा शुभ। कुछ लोगों के मन में यह बेचैनी लंबे समय तक बनी रहती है कि सब की कुंडली है केवल मेरी ही कुंडली नहीं तो आइए जानते हैं गुरु वैदिक इसमें क्या मदद कर सकते हैं।

भविष्यवाणी बिना कुंडली – GuruVedic

हमारे यहां अनेक लोग ऐसे आते रहते हैं जिनके पास अपनी जन्म तारीख जन्म समय आदि का ज्ञान नहीं होता। सबसे पहला और महत्वपूर्ण माध्यम जिसे हम अपनाते हैं वह है हस्तरेखा शास्त्र। आपके दोनों हाथों की रेखाओं का एक प्रिंट लिया जाता है। हम कुछ दिन अध्ययन करने के लिए यह प्रिंट रख लेते हैं और कुछ दिन बाद आपको भविष्यवाणी दी जाती है। मुख्य तौर पर हम आपके हाथों में पर्वतों तथा रेखाओं का अध्ययन करते हैं इसके अतिरिक्त आपकी उंगलियों की बनावट आकार और मणिबंध आदि का अध्ययन किया जाता है जो एक अलग विषय है इस पर विस्तार से चर्चा कहीं और की जाएगी।

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गहन परामर्श

दूसरा माध्यम जो हम अपनाते हैं वह है काउंसलिंग इसमें आपसे कुछ प्रश्न किए जाते हैं आपके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं के घटने की तारीख और उससे जुड़े गोचर ग्रहों का अध्ययन किया जाता है। उदाहरण के तौर पर किसी से हमने पूछा कि आपके फेवरेट दो रंग कौन से हैं। आपका प्रिय खेल कौन सा है। आपको किस सब्जेक्ट में अधिक रुचि है। इनसे हमें यह पता चलता है कि किस ग्रह का अधिकतम प्रभाव आपके जीवन पर है फिर हम उस ग्रह से संबंधित ग्रह गोचर देखते हैं और फल कथन करते हैं।

आपकी कुंडली के शुभ और अशुभ ग्रहों का पता इस तरह भी लगाया जा सकता है…

सूर्य

आपके सिर के बालों से पता चल जाएगा कि आपका सूर्य कैसा है यदि आपके बहुत घने बाल हैं तो आपका सूर्य मजबूत है। यदि कम उम्र में ही आपके बाल झड़ चुके हैं तो आपका सूर्य कमजोर है पिता का सुख नहीं है तो सूर्य पाप ग्रहों से पीड़ित है शत्रु राशि में है। यदि हड्डियां कमजोर हैं और आत्मविश्वास की कमी है तभी सूर्य कमजोर माना जाएगा।

चंद्रमा

यदि चंद्रमा कमजोर है तो आपका बचपन संघर्ष से भरा रहेगा।  बचपन में चोट बीमारी या मुसीबत से जान जाते-जाते बची होगी। शरीर बहुत दुबला पतला होगा तो चंद्रमा की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। 

मंगल

आपके चेहरे का रंग देखकर मंगल के शुभ या अशुभ होने का पता लगाया जा सकता है हाथों का रंग बताता है कि आपका मंगल बलवान है या निर्बल। 

बुध

यदि बुध कमजोर हो तो इसका पता आपके दांतों की बनावट से इसका पता चल जाता है। आपको यदि त्वचा संबंधी कोई दिक्कत परेशानी है तो निश्चित तौर पर आपका बुध पीड़ित या निर्बल है।

बृहस्पति

बृहस्पति निर्बल हो तो शरीर बेडौल रहता है परंतु यदि आप फिट हैं तो इसका अर्थ यह नहीं कि बृहस्पति बलवान है इसके और कारण हो सकते हैं। आपकी कुंडली में यदि वृहस्पति निर्बल है तो आपको पेट की बीमारियां अवश्य होंगी और यदि बलवान है तो आपकी खाने पीने की क्षमता अत्यधिक होगी।

शुक्र

आपकी कुंडली का शुक्र यदि बलवान है तो आप की वेशभूषा स्टाइल और व्यवहार से इसकी पुष्टि हो जाती है। कुछ लोग कैसा भी नया कपड़ा पहन ले उन पर पुराना लगता है या फिर जचता नहीं है ऐसा शुक्र के निर्बल होने की वजह से होता है। शुक्र यदि नीच का हो तो दिखने में जातक बहुत ही साधारण लगता है यदि उच्च का हो तो जातक दिखने में प्रभावशाली लगता है।

शनि

शनि यदि कमजोर हो तो शरीर पर इसके लक्षण दिखाई दे जाते हैं जिन्हें बयान करना मुश्किल है उदाहरण के लिए पैर पर चोट का निशान होता है या फिर आपके चलने का तरीका अजीब होगा।

यदि आपका शनि कुंडली में बलवान है तो आप की आवाज सुनने मात्र से इस बात का पता चल जाता है आप बेहद कम शब्दों में दूसरे लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ सकते हैं। अमीर होने के बावजूद आप का रहन सहन और स्टाइल बेहद साधारण परंतु प्रभावशाली होगा।

आपका चरित्र बता देता है कि आपका शनि बलवान है या निर्बल।

राहू

राहु यदि आपकी कुंडली में बलवान है तो आपके हाव-भाव से इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है। जिनका राहु कमजोर होता है वह बहुत बेचैन दिखाई देते हैं। जिनका राहु बहुत अच्छा होता है वह कॉन्फिडेंट और चेहरे पर रहस्यमई स्माइल रखते हैं अपनी बात को बहुत कम शब्दों में समझा सकते हैं। सही समय पर सही डायलॉग बोलना या फिर मुहावरे लोकोक्तियां आदि का यथोचित प्रयोग करना इससे पता चलता है कि आपका राहु बहुत बलवान है।

केतू

केतु के विषय में भविष्यवाणी करना थोड़ा बहुत कठिन होता है परंतु चेहरे पर या शरीर पर कहीं फोड़े फुंसियों के निशान दाग धब्बे झाइयां आदि होने पर केतु की स्थिति का पता चलता है। केतु से संबंधित लोगों की एक विशेषता यह होती है कि वह सीधी बात कभी नहीं करते। उन्हें कुछ पूछना हो तो इस तरह अपनी बात पेश करते हैं कि आप स्वयं उनकी बात का जवाब देने के लिए उत्सुक हो जाते हैं इसके अतिरिक्त उनके कार्यकलाप के विषय में कुछ ना कुछ तो जरूर ऐसा होता है जो दिखाई ना दे।

ऊपर दिए गए सिद्धांत सीमित नहीं है परंतु स्थानाभाव होने के कारण अधिक जानकारी नहीं दी जा सकती। अनेक नियम ऐसे हैं जो तुरंत प्रकट होते हैं जब उनकी आवश्यकता होती है। ज्योतिष एक ब्लेसिंग है इसलिए भविष्यवाणी करने के लिए साधनों की अपेक्षा साधना की आवश्यकता पड़ती है।

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