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लोग आपसे क्यों रूठते हैं? क्या हमारा समय खराब चल रहा है? खराब समय के क्या हैं संकेत? कैसे पता करें कि हमारे ग्रह खराब चल रहे हैं? गुरु वैदिक ज्योतिषी आभास आपको बता रहे हैं कि बुरे समय के क्या हैं संकेत। 

बुरे समय के क्या हैं संकेत
बुरे समय के क्या हैं संकेत

वे बिन्दु जिन पर यह लेख आधारित है।

  • खराब समय के क्या हैं लक्षण?
  • सूर्य से संबन्धित रिश्ते 
  • चंद्रमा से संबन्धित रिश्ते 
  • मंगल से संबन्धित रिश्ते 
  • बुध से संबन्धित रिश्ते 
  • गुरु से संबन्धित रिश्ते 
  • शुक्र से संबन्धित रिश्ते 
  • शनि से संबन्धित रिश्ते 
  • राहू केतू से संबन्धित रिश्ते 

हर किसी के जीवन में अच्छा और बुरा समय आता है इससे कोई बचता नहीं है यह सच है कि अच्छे और बुरे समय में समान भाव बनाए रखना जरूरी है परंतु कहने में यह आसान लगता है। यदि आप ऐसा करना चाहते हैं तो सबसे पहले आवश्यकता होगी कि आप समय को पहचाने अच्छे और बुरे समय की पहचान होने के पश्चात समभाव बनाए रखना कठिन नहीं रहेगा।

खराब समय के क्या हैं लक्षण

जब बुरे समय की शुरुआत होती है तो अक्सर यह मनमुटाव से शुरू होती है और अंत में यही निष्कर्ष निकलता है कि हम किसी व्यक्ति से बातचीत करना बंद कर देते हैं। यही बुरा समय है यहीं से इसकी शुरुआत है। हमें कोई ना कोई बहाना मिल जाता है रूठने का नाराज होने का। धीरे-धीरे कारोबार में ऊर्जा और उत्साह का अभाव होने लगता है।

स्वास्थ्य की समस्याएं उत्पन्न होने लगती है। किसी ना किसी तरह से सामने वाले का नुकसान करने की इच्छा होती है और जब यह इच्छा पूरी नहीं होती तो इसका गुस्सा दूसरे लोगों पर फूटता है इससे और लोग नाराज हो जाते हैं। इस तरह से आसपास के बहुत से लोगों को नाराज करने के बाद स्वयं से व्यक्ति सवाल पूछता है क्या वाकई बुरा समय चल रहा है। फिर जगदीश ज्योतिष का सहारा लेना चाहता है।

अब सवाल उठता है कि नाराज होने से ग्रहों का क्या संबंध? अरे भाई संबंध ही संबंध है क्योंकि ज्योतिष में हर ग्रह किसी न किसी रिश्ते की ओर इशारा करता है। आइये जानते हैं सिलसिलेवार ग्रह और रिश्ते नाते। 

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सूर्य से संबन्धित रिश्ते 

सूर्य पिता और ससुर से संबंधित है उच्च अधिकारी से संबंधित है सीनियर अफसर से संबंधित है या फिर आपके workplace पर कोई ऐसा व्यक्ति जिसे आप अपने से अति श्रेष्ठ मानते हैं उससे संबंधित है। सूर्य सरकारी लोगों से संबंधित है जिनसे आपको कुछ अपेक्षा है। 

चंद्रमा से संबन्धित रिश्ते 

चंद्रमा उन लोगों से संबंधित है जो एक प्रतिभाशाली प्रभावशाली महिला के रूप में या तो आपकी सीनियर है या फिर कोई सरकारी अफसर। माता या सासू मां चंद्रमा से संबंधित हैं। आपकी ऐसी मित्र जो बहुत अधिक भावुक और बातूनी है चंद्रमा उसी से संबंधित है।

मंगल से संबन्धित रिश्ते

मंगल के बारे में कहें तो रक्त संबंधों में जितने रिश्ते आते हैं वह सब मंगल से संबंधित हैं इसके अतिरिक्त आप के जितने चचेरे  ममेरे भाई बहन है वे मंगल से संबंधित है।

बुध से संबन्धित रिश्ते 

 इसी प्रकार से बुध बहन बुआ और बेटी से संबंधित होता है कोई बिजनेसमैन या Successful Person बुध के अधिकार क्षेत्र में आता है। आपका ऐसा मित्र जो बहुत मतलबी है। आपका एक ऐसा मित्र जो बहुत चालाक और मीठा बोलने वाला है बुध से निर्देशित होता है। संक्षेप में कहें तो जितने मतलबी और चालाक दोस्त आप के संपर्क क्षेत्र में होते हैं वह सब बुध से संबंध रखते हैं।

बृहस्पति से संबन्धित रिश्ते 

बृहस्पति से संबंधित रिश्ते वह हैं जो या तो आप के गुरु हैं या फिर गुरु के समकक्ष है। कोई विद्वान व्यक्ति जो आपका गुरु नहीं भी है वह बृहस्पति से संबंधित हो सकता है। आप के संपर्क क्षेत्र में जितने सज्जन पुरुष और महिलाएं हैं जिनका चरित्र बहुत अच्छा है जो संपन्न और पढ़े-लिखे परिवार से संबंधित हैं वह सब बृहस्पति के क्षेत्र में आते हैं इसके अतिरिक्त पुत्र और दादा बृहस्पति द्वारा निर्देशित होते हैं।

शुक्र से संबन्धित रिश्ते 

कन्या संतान छोटे-छोटे बच्चे ब्राह्मण महिला सुंदर लड़कियां जो आपकी रिश्तेदार भी हो सकती हैं और दोस्त भी वह सब शुक्र से संबंधित हैं। आपके संपर्क क्षेत्र में जितने लोग कलाकार हैं आर्टिस्ट मनोरंजन से संबंधित कार्य करने वाले मेकअप करने वाले सौंदर्य और फैशन से संबंधित लोग यह सब शुक्र से संबंधित होते हैं। 

शनि से संबन्धित रिश्ते 

पिता का बड़ा भाई घर के बुजुर्ग ऐसे भाई जिसके साथ उम्र का डिफरेंस काफी अधिक हो ससुर के भाई यह सब रिश्तेदार शनि के साथ संबंध रखते हैं आपके गरीब दोस्त या ऐसे दोस्त जो पब्लिक सेक्टर में काम करते हैं वह सब शनि के अंतर्गत आते हैं। 

राहू केतू से संबन्धित रिश्ते 

राहु की बात करें तो जितने रिश्तेदारों के साथ आपके रक्त का संबंध नहीं है वह सब राहु और केतु के अंतर्गत आते हैं। आपके पड़ोसियों का प्रतिनिधित्व राहु और केतु करते हैं। देर रात में या सुबह सुबह आने वाले Customer और Clients का प्रतिनिधित्व भी राहु और केतु ही करते हैं। 

निष्कर्ष

ग्रहों का अधिकार क्षेत्र आपकी पूरी दुनिया है। जब जो ग्रह खराब होता है उससे संबंधित दोस्त रिश्तेदार या संबंधी आप से दूर होने लगते हैं वजह चाहे कुछ भी हो। कभी कभी एक ही ग्रह के खराब होने से कई ग्रहों पर उसका असर पड़ता है। 

ग्रहों को आप तभी कंट्रोल कर सकते हैं यदि आप अपने रिश्तो को कंट्रोल कर पाए इसलिए अपनी दुनिया को अपने आप से दूर मत होने दें। रूठने वाले की तो प्रेडिक्शन नहीं हो सकती परंतु प्रयास यह होना चाहिए कि आप की ओर से इसकी पहल ना हो। 

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