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हर किसी के जीवन में टर्निंग प्वाइंट अवश्य आता है क्योंकि समय सदा एक सा नहीं रहता। ज्योतिष में इसे दशा अंतर्दशा का बदलाव कहते हैं कम से कम एक ग्रह की अवधि जीवन में 8 वर्ष तक रहती है इतने वर्षों के पश्चात समय बदलता है।

यह बदलाव अच्छा या बुरा कुछ भी हो सकता है परंतु इसमें सब कुछ आश्चर्यजनक तरीके से बदलता है कल्पना कीजिए पिछली बार आपके जीवन में ऐसा बदलाव कब आया था।

टर्निंग प्वाइंट - जीवन का नया मोड़

अपमान और अपयश इसके जन्मदाता है जब कभी जीवन में आपका बहुत अधिक अपमान हो या बुरे दौर से गुजर ना पड़े तो समझ ले कि जीवन का वह टर्निंग प्वाइंट करीब आ गया है

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जानिए आपकी जन्म कुंडली के अनुसार जीवन का वह मोड़ कब आने वाला है जिसमें उल्लेखनीय बदलाव होंगे।

नौ ग्रहों का कार्यकाल आपके पूरे जीवन में 120 वर्ष तक हो सकता है। हर ग्रह की अपनी एक निश्चित अवधि है जिस अवधि के दौरान कोई ग्रह आपके जीवन में अपना प्रभाव दिखाता है।

सूर्यादी ग्रहों की महादशा का कार्यकाल

  • जैसे सूर्य की महादशा 6 वर्ष चलती है।
  • चंद्रमा की महादशा 10 वर्ष चलती है।
  • मंगल की महादशा 7 वर्ष चलती है।
  • बुध की महादशा 17 वर्ष चलती है।
  • गुरु की महादशा 16 वर्ष चलती है।
  • शुक्र की महादशा 20 वर्ष चलती है।
  • शनि की महादशा 19 वर्ष चलती है।
  • राहु की महादशा 18 वर्ष चलती है।
  • केतु की महादशा 7 वर्ष निर्धारित उम्र होती है

 वर्तमान में आप भी किसी ना किसी ग्रह की अवधि के दौरान उस ग्रह का पूरा फल प्राप्त कर रहे हैं। अधिकतम 19 वर्ष की महादशा होती है इसके पश्चात जीवन पूरी तरह बदलता है इसी को जीवन का टर्निंग प्वाइंट कहते हैं हालांकि महादशा अंतर्दशा कई प्रकार की होती हैं परंतु विंशोत्तरी महादशा को अधिकतर विद्वान आधार मान कर चलते हैं।

यदि जीवन में कष्ट कठिनाइयां और संघर्ष एक समय पर आकर ठहरने लगे कम होने लगे तो समझ ले कि यहीं से जीवन का टर्निंग प्वाइंट शुरू होता है।

आपके जीवन का टर्निंग प्वाइंट कैसा रहेगा आपकी जन्मकुंडली बता सकती है। वर्तमान में आप किस ग्रह से प्रभावित हैं और भविष्य में कौन से ग्रह की रशिया आपको प्रभावित करेंगे किस ग्रह का इफेक्ट आप पर होने वाला है यह सब ज्योतिष बता सकता है


आपकी कुंडली चाहे कैसे भी हो परंतु हर महादशा अंतर्दशा कि अपनी एक नेचर होती है या कहें नैसर्गिक स्वभाव होता है आइए जानते हैं विस्तार से।

सूर्य की महादशा कैसी रहेगी

जब सूर्य की महादशा आती है तब अधिकतर लोगों का नया कारोबार शुरू होता है अधिकार मिलता है पद मिलता है प्रतिष्ठा मिलती है सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी मिलती है संक्षेप में कहा जाए तो इस समय में जातक कर्मठ बनता है

चंद्रमा की महादशा में क्या होगा

चंद्रमा की दशा में वंश की वृद्धि होती है बेजान पड़ी जिंदगी गति पकड़ती है जीवन तेज रफ्तार से चलता है समय का पता ही नहीं चलता यह 10 वर्ष जीवन में सबसे अधिक व्यस्त रहने वाला समय होता है

मंगल की महादशा में क्या होगा

मंगल की दशा में संघर्ष लड़ाई झगड़े और मुसीबत आती है नए संबंध बनते हैं पुराने संबंध टूटते हैं रिश्तेदारों का मिलना बिछड़ना लगा रहता है

बुध की महादशा कैसी रहेगी

बुध की महादशा में जातक संपर्क क्षेत्र बढ़ता है व्यक्ति सामाजिक बनता है और समाज से नित नए संबंध बनते हैं जीवन का विस्तार होता है गलतियों से सबक मिलता है और यही सबक आगे चलकर जीवन का आधार बनते हैं एक भोला भाला सीधा साधा जगती इसी दशा में चालाक बन जाता है बुद्धि की कायापलट का समय यहीं से शुरू होता है

गुरु की महादशा का फल

गुरु की महादशा में जातक के ज्ञान और इंद्रियों की परीक्षा होती है जातक इस समय में समझदार बनता है जिम्मेदारियां निभाता है अपने बनाए धर्म पर कायम रहता है और संतान संबंधी महत्वपूर्ण कार्य इसी दशा में संपन्न होते हैं कुल की वृद्धि और कुल की तरक्की इसी दशा में होती है

शुक्र की महादशा का फल

शुक्र की महादशा में व्यक्ति भौतिक सुख सुविधाओं का भोग करता है धन अर्जन करता है और यही वह समय है जब एक व्यक्ति जीवन का आनंद ले पाता है जीवन का बाकी समय तो जिम्मेदारियों और देनदारियों में निकल जाता है शुक्र की महादशा के इस समय में जातक अपना जीवन आनंद से बिताता है इस दशा को देखकर कोई भी कह सकता है कि जीवन कितना खूबसूरत है

शनि की महादशा का फल

शनि की महादशा में मनुष्य को पता चलता है कि इस जीवन को मृत्यु लोक और दुखों का घर क्यों कहते हैं इस दशा में अनेक बार जातक मृत्यु को सामने देखता है और महसूस करता है यही वह दशा है जब व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का पता चलता है यदि बचपन में यह दशा आ जाए तो जातक को बचपन से ही जिम्मेदारियां निभानी पड़ती है यदि बुढ़ापे में यह दशा आए तो बुढ़ापा देर तक नहीं रहता एक व्यक्ति के जीवन की परम ऊर्जा का ह्रास या पतन यहीं से होता है कौन अपना है कौन पराया है बहुत जल्दी जगती को इस बात का एहसास हो जाता है वास्तव में जिसके जीवन में यह दशा जल्दी आ जाती है वह अन्य लोगों से अधिक समझदार हो जाता है उसकी तुलना अपनी उम्र के लोगों से नहीं हो सकती बल्कि अपने से कहीं बड़े व्यक्तियों से उसकी तुलना की जा सकती है

राहू की महादशा में क्या होता है

राहु के समय में मनुष्य को आभास होता है कि अकेलापन क्या है राहु की महादशा व्यक्ति को हर किसी से दूर कर देती है रिश्ते नातों का पता इसी दशा में चलता है इस दुनिया में हर कोई अकेला है ऐसी दशा में आभास होता है मान अपमान यश अपयश और तरह-तरह के आडंबर दिखावा लोकप्रियता तड़क-भड़क एक क्षण में मिलती है दूसरे क्षण का पता नहीं होता आकस्मिकता किसको कहते हैं इतिहास क्या है यही दशा बताती है विदेश गमन चारित्रिक वतन नीच की सेवा मोह का नाश मोहभंग अपनो से बिछड़ना वियोग संजोग तिरस्कार नीच कर्म यह सब इसी दशा में पता चलता है

केतू की महादशा में क्या होता है

केतु की महादशा में वह सब होता है जो व्यक्ति के सामर्थ्य के बाहर है केतु की महादशा में यदि बीमारी हो जाए तो इसका इलाज के तू ही करता है डॉक्टर नहीं इसी दशा में पता चलता है कि भगवान क्या है क्या आपने कभी चमत्कार देखे हैं यदि नहीं तो केतु की दशा में अवश्य देखने को मिलेंगे एक व्यक्ति का आध्यात्मिक उत्थान इसी दशा से आरंभ होता है एक बार यह दशा जीवन में आ जाए तो इसका प्रभाव पूरे जीवन काल तक रहता है क्योंकि आत्मा शरीर में तब तक रहती है जब तक जीवन है और केतु का संबंध उसी आत्मा और परमात्मा से है इसी समय में जातक को ऐसे कार्य करते हुए देखा जाता है जिसकी पहले कल्पना नहीं की जा सकती केतु की दशा में आपका शरीर आपका नहीं रहता बल्कि आपका जीवन ही दूसरों द्वारा संचालित होता है केतु की दशा में एक मनुष्य को पता चलता है कि बेबसी किसे कहते हैं

उपरोक्त जानकारी मनोरंजन के लिए है यदि किसी भी प्रकार की दुविधा या शिकायत मन में है तो पाठक अपने विवेक से काम लेंगे ऐसी हम उम्मीद करते हैं

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