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बचपन में कोई टेंशन नहीं होती। जवानी में शादी और प्यार की फिक्र होती है। इसके बाद होती है शादी। शादी के बाद कारोबार की चिंता होना स्वाभाविक है परंतु जैसे ही संतान का जन्म होता है इंसान का पूरा जन्म ही बदल जाता है। इसके बाद इंसान जो भी चिंता करता है वह अपनी संतान के लिए करता है और वह भी बिना किसी स्वार्थ के।

इस पोस्ट में हम उन लोगों की ओर इशारा कर रहे हैं जो किसी ना किसी वजह से संतान की ओर से पीड़ित हैं इनमें कुछ लोग वह हैं जिनके पास संतान है ही नहीं और संतान के लिए भगवान पर उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसके पश्चात वे लोग जिनके पास संतान तो है परंतु उसके होने के बावजूद एक कमी का एहसास है।

वैदिक ज्योतिष से संतान की भविष्यवाणी

वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली के बारह घर तरह तरह के कष्ट और दुखों से जुड़े होते हैं। यूं तो लोग कहते हैं कि कुंडली के कुछ स्थान शुभ हैं और कुछ  स्थान अशुभ परंतु वास्तव में कुंडली का कोई भी स्थान शुभ या अशुभ नहीं होता बल्कि कुंडली में बैठे ग्रह किसी स्थान को शुभ या अशुभ बना देते हैं।

पाँचवाँ घर और संतान का भविष्य

पांचवा घर मनोरंजन का स्थान है इसे हम इस तरह से समझ सकते हैं कि आपने जीवन में परम सुख और मनोरंजन प्राप्त किया है तो वह कुंडली के इसी स्थान से जुड़ा है। फिर चाहे वह प्रेमिका के साथ मिलन हो या फिर पढ़ाई में सफलता का सुख। अचानक आपकी लॉटरी लगने पर आपको जिस तरह के सुख की प्राप्ति होती है वह इसी स्थान से जुड़ा है। इनसे ऊपर भी एक सुख होता है वह है संतान का सुख क्योंकि इस सुख के लिए एक इंसान अपना सर्वस्व न्योछावर कर सकता है। पांचवें घर में यदि कुछ अशुभ है तो इंसान को संतान के बारे में चिंता अवश्य होती है।

आप ज्योतिषी नहीं है इसलिए इस विषय को ज्योतिष के नियमों द्वारा कठिन बना कर मैं आपको नहीं समझाना चाहता परंतु हमें यह समझना होगा कि हर मनुष्य के लिए कुंडली का पांचवा घर परम शुभ होना आवश्यक है।

बात सिर्फ इतनी सी है कि यदि आपकी कुंडली में पांचवें घर में कुछ गड़बड़ है तो उसे एक योग्य ज्योतिषी अच्छी तरह से पहचान कर उसके उपाय कर सकता है या उपाय करने की कोशिश कर सकता है। निश्चित रूप से हर कष्ट के निवारण के लिए उपाय ज्योतिष में उपलब्ध है। असंभव को संभव कर देने की क्षमता वैदिक ज्योतिष में है।

यदि पाँचवाँ घर अशुभ हो तो संतान की भविष्यवाणी

अब बात करते हैं परिस्थितियों की। जब कुंडली का पांचवा घर जन्म कुंडली में सूर्य द्वारा प्रभावित हो तो अपने से भी अधिक उत्तम संतान की प्राप्ति होती है परंतु यही सूर्य यदि राहु द्वारा प्रभावित हो जाए तो उस उत्तम संतान के कष्ट को भी हम अपने जीवन काल में अनुभव करते हैं।

हम देखते हैं माता-पिता ने संतान को पढ़ाया लिखाया और विदेश भेज दिया उनके सुख के लिए परंतु आगे चलकर वही संतान माता-पिता को अकेला छोड़ देती है और जीवन चक्र एक नए परिवार के रूप में आगे बढ़ता रहता है। यही होता आया है और यही होता भी रहेगा इसमें कुछ भी नया नहीं है परंतु यह सब राहु के पृथकताजनक प्रभाव के कारण होता है। निश्चित तौर पर यदि आप चाहें तो इसका निवारण हो सकता है।

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संतान के विषय में जानकारी के लिए अनेक प्रकार की विधियों से हम भविष्यवाणी कर सकते हैं जो कि इस प्रकार हैं।

  • आपकी कुंडली से संतान की भविष्यवाणी।
  • आपके पार्टनर की कुंडली से संतान की भविष्यवाणी।
  • आपकी संतान की डेट ऑफ बर्थ से संतान की भविष्यवाणी।
  • आप तीनों की कुंडली से संतान के संबंध में भविष्यवाणी

चौथे नंबर की मदद से हम अत्यधिक सटीक संतान संबंधी भविष्यवाणी कर सकते हैं।

कैसे प्राप्त करें संतान की भविष्यवाणी

नीचे दिए गए फॉर्म में आप हमें अपनी डिटेल भरकर भेजें और अपना प्रश्न डिटेल में पूछें। निश्चित तौर पर हम हर ईमेल का रिप्लाई करते हैं परंतु इसमें थोड़ा इंतजार करना पड़ता है।

अपने अगले आर्टिकल में हम सिलसिलेवार रूप से समझेंगे कि सूर्य आदि ग्रहों के अनुसार संतान पर क्या असर पड़ता है और उसका उपाय क्या है।

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